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देशभर में दही हांडी की धूम, मुंबई में आयोजन के दौरान 35 गोविंदा घायल

कृष्ण जन्मोत्सव पर दही-हांडी उत्सव मनाने के लिए मुंबई समेत महाराष्ट्र के दूसरे इलाकों में गोविंदाओं की कई टोली बाहर निकलीं. खासकर मुंबई के कई इलाकों में मटकी तोड़ने पर लाखों के इनाम रखे गए हैं. सबसे ज्यादा 25 लाख रुपये का पुरस्कार घाटकोपर वेस्ट के बीजेपी विधायक राम कदम के पंडाल पर रखा गया है. इनामी राशि ज्यादा होने की वजह से गोविंदाओं की कई टोलियां इस पंडाल पर पहुंच चुकी हैं.

दही-हांडी के दौरान हादसा

दही-हांडी उत्सव के दौरान मटकी तोड़ने का उत्साह चरम पर होता है. इस बार मटकी लटकाने की ऊंचाई पर कोई सीमा नहीं होने की वजह कई पंडालों ने इसे काफी ऊंचाई पर लटकाया है. इस वजह से कई इलाकों से गोपालों के घायल होने की खबरें भी आईं. वाशी में दही-हांडी उत्सव के दौरान मटकी फोड़ने की कोशिश में गोविंदा आदित्य काले घायल हो गए. काफी ऊंचाई से गिरने के बाद उसका हाथ फ्रेक्चर हो गया. मुंबई के अलग-अलग इलाकों से अब तक 35 गोविंदाओं के घायल होने की खबर आ चुकी है.

खूबसूरत थीम और अनोखे गोविंदा

दही-हांडी उत्सव पंडालों को विशेष थीम से सजाया गया था. मंत्री एकनाथ शिंदे के थाणे वाले पंडाल को फीफा के फुटबॉल फीवर की शक्ल दी गई है. इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस होने की वजह से कई गोविंदा तिरंगे को फेस पर या बॉडी पर पेंट करके पंडालों तक पहुंचे. हालांकि बारिश की वजह से मटकी फोड़ने में कई टोलियों को निराशा हाथ लगी.

उत्सव पर GST का असर

ठाणे समेत कई पंडालों पर भक्तों और गोविंदाओं की काफी भीड़ उमड़ी. मुंबई के दो बड़े पंडालों में इस बार पारंपरिक दही-हांडी का आयोजन नहीं किया है. जानकारी के मुताबिक नोटबंदी और जीएसटी की वजह से इस बार या तो ज्यादातर दही-हांडी उत्सव रद्द हो गए या तो छोटे स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं. जीएसटी और आयकर विभाग के डर से उत्सव में इनामी राशि को भी काफी कम रखा गया है ताकि वह किसी भी तरह आयकर विभाग के रडार पर ना आ जाएं.

जानें क्या है दही-हांडी

दही-हांडी उत्सव में मटकी तोड़ने प्रतियोगिता होती है. इसमें ऊंचाई पर हांडी को लटकाया जाता है. इसके बाद युवा गोविंदाओं की टोली एक दूसरे पर चढ़कर हांडी को फोड़ने का प्रयास करती है. पंडाल में तेज आवाज में गाने बजाकर गोपालों का उत्साह बढ़ाया जाता है. वहीं उत्सव देखने आए लोग हांडी फोड़ने वालों पर पानी फेंककर उनका काम मुश्किल बनाने की कोशिश भी करते हैं. कुछ साल पहले तक इस उत्सव में लड़कों का बोलबाला था, लेकिन अब लड़कियों ने भी अपने ग्रुप बनाकर आयोजन में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है.

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