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लकवाग्रस्त वृद्ध ने पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया, सरकार ने जलील करके भगाया था




लकवाग्रस्त 63 वर्षीय ससी रोजाना अपना परिवार चलाने के लिए सरकार से मदद चाहता था परंतु अफसरों ने उसकी हंसी उड़ाई और जलील करके भगा दिया। पंचायत ने भी कोई मदद नहीं की परंतु ससी ने हार नहीं मानी। 3 साल लगातार मेहनत करके उसे पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया। सरकार ने अब भी उसकी मदद नहीं की लेकिन आम जनता ने सहयोग किया और उसे एक तीन पहिए वाला स्कूटर दिला दिया।

बीते 3 सालों से 63 वर्षीय ससी रोजाना 6-6 घंटे पहाड़ खोदने का काम करते रहे और आज उनकी मेहनत रंग लाई कि उन्होंने पहाड़ चीरकर 200 मीटर चौड़ा रास्ता बना दिया। माउंटेन मैन के नाम से प्रसिद्ध बिहार के दशरथ मांझी के बारे में ससी ने कभी सुना नहीं था लेकिन उन्होंने मांझी की तरह ही अविश्वसनीय काम कर दिया। ससी के शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त है और वे बमुश्किल दाएं हाथ और पैर का उपयोग कर पाते हैं। ससी ने ये सब इसलिए किया कि वे काम पर जा सके और अपने परिवार की मदद कर सके।



ससी पेड़ पर चढ़कर परंपरागत रूप से नारियल तोड़ने का काम करते थे लेकिन 18 साल पहले वे हादसे का शिकार हुए और काफी ऊंचाई से सीधे नीचे जमीन पर आ गिरे, जिससे उनके शरीर के दाहिने हिस्से में लकवा मार गया। वे महीनों बिस्तर पर रहे। घर चलाने के लिए उनके बच्चों ने पढ़ाई छोड़ काम करना शुरू किया।
ससी का कहना है कि वे पेड़ों पर चढ़ने में माहिर थे लेकिन उस दिन वे फिसले और सीधे नीचे आ गिरे और उनके शरीर के हिस्से में लकवा मार गया। दायां पैर और हाथ टूट गए। कई साल उन्हें खड़े होने में लगे। ससी ने तय किया कि वे तीन पहिया स्कूटर खरीदकर पास के शहर तिरुअनंतपुरम में लॉटरी के टिकट बेचने का काम शुरू करेंगे ताकि परिवार को हाथ बंटा सके। स्कूटर के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी और इसके लिए उन्होंने पंचायत को आवेदन किया। लेकिन अधिकारियों ने उसकी हंसी उड़ाई कि ससी क्या स्कूटर हवा में उड़ाकर ले जाएंगे क्योंकि उसके घर के सामने पहाड़ था।
ससी ने हर स्तर पर गुहार लगाई, अधिकारियों के पैर पकड़े कि उनके घर तक रास्ता बना दिया जाए लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। निराश ससी ने साल 2013 में फैसला किया कि वो खुद पहाड़ खोदकर रास्ता बनाएगा। ससी के लिए पहाड़ खोदने से बड़ी चुनौती उनकी शारीरिक दिव्यांगता थी क्योंकि औजार के रूप में उनके पास फावड़ा, गेती जैसे घरेलू औजार ही थे। लेकिन ससी ने ठान लिया था कि वे खुद को साबित करेंगे।
ससी ने तय किया कि वे रोजाना सुबह 5 से 8.30 और फिर शाम 4 बजे से अंधेरा होने तक काम करेंगे। काम की शुरुआत में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और उन्हें कई चोटें भी आईं लेकिन उ
न्होंने हार नहीं मानी। शुरू में लोगों ने ससी का मजाक उड़ाया, लेकिन बाद में जब खुदाई का काम दिखने लगा तो पड़ोसियों ने उसका उत्साहवर्धन किया।



ससी ने तीन सालों तक लगातार काम कर वो चमत्कार कर दिखाया जिसके बारे में आम लोग सोच ही नहीं पाते। हालांकि ससी का संघर्ष समाप्त नहीं हुआ था और पंचायत से अब भी उसकी कोई मदद नहीं हो रही थी। उसकी कहानी जब ऑनलाइन वायरल हुई तो जनता के दबाव में पंचायत को ससी की मदद करना पड़ी। ससी की दास्तान का सबसे सुखद पहलू ये रहा कि पंचायत ने उसकी कोई आर्थिक मदद भले ही ना की हो लेकिन आम जनता और इंटरनेट पर लोग उनसे जुड़े और उनकी भरपुर मदद की। लोगों ने ही उपहार में ससी को तीन पहिया स्कूटर दिया।

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